Wednesday, February 9, 2011

Latifshaah, राज दरी aur देव दरी का नज़ारा











लतीफशाह, राजदारी और देव दरी का नज़ारा

उत्तर प्रदेश का चंदौली जनपद अपने गोद में तमाम विरासत को समेटे हुए है।
पहाड़ों के बीच बहते झरने व नदियों की कल-कल करती आवाज़ सबको बरबस ही अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। विन्ध्य पर्वत श्रंखला की पहाड़ों में न जाने कितने रहस्य और तिलिश्म छुपे हैं। नवगढ़ और चुनर गढ़ की घाटियों में चन्द्रकान्ता की याद आज भी ताज़ा हैं। चंद्रप्रभा जीव अभयरड़ में न जाने कितने जंगली जानवर विचरड़ कर रहे हैं। सामाजिक सद्भाव के प्रतीक लतीफशाह बाबा की आत्मा इसी घटी में बस्ती है। राज दरी और देव दरी जैसे मनोरम जल प्राप्त इसी घटी में है। बात चाहे मुसखाद बाँध की हो या विन्डम फाल की नसब यहीं है। इसी घाटी में दफ़न है गहड्वाल राजवंश का इतिहास और इसी घाटी में घुरहूपुर की पहाड़ियों पर स्थित है महात्मा बुद्ध के पद चिन्ह!
तो आप लोगों को पेश है कुछ चित्र इसकी सम्पन्न विरासत के खंडहरों के।

आपका ही अपना
अफसर खान सागर
09889807838

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